इश्क़

कम हो कर भी बहुत है, ये इश्क़ भी एक मीठा ज़हर हैन होने पर दर्द से खामोश है, होकर भी दर्द में खामोश है,क्या बला है ? क्या…… Read more “इश्क़”

देखा है.…

मैंने देखा है.… सूरज ढलते देखा है; अँधेरा बढ़ते देखा है ;सवेरा होते देखा है ;शाम में रंगों को घुलते देखा है;माँ के आँचल से इत्मिनान देखा…… Read more “देखा है.…”

उड़ान

 कल अखबार रख छोड़े थे मेरी चौखट पर कुछ फिर वापस बटोर लाया… सोचा यही बचा है समेटने सहेजने को,याद रखना छोड़ ही दिया हैअगले दिन कुछ और गायब…… Read more “उड़ान”